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मध्यप्रदेश में 5 किसानों की हत्या के विरोध में

मध्यप्रदेश में 5 किसानों की हत्या के विरोध में बर्तोल्त ब्रेख्त की एक प्रासंगिक कविता - आठ हजार गरीब लोगों का नगर के बाहर इकट्ठा होना 🖋 कुंदन सिंह कनिष्क आठ हजार से अधिक बेरोजगार खानकर्मी, अपने बीवी-बच्‍चों समेत बुडापेस्‍ट के बाहर साल्‍गोटार्जन रोड पर जामा हो रहे हैं। उन्‍होंने अपने अभियान में पहली दो रातें बिना कुछ खाये-पिये ही गुजार दी है। उनके शरीर पर बेहद नाकाफी जीर्ण-शीर्ण कपड़े हैं। देखने में वे बस हड्डियों के ढांचे ही भर हैं। अगर वे खाना और काम पाने में नाकाम रहे,  तो उन्‍होंने कसम खा रखी है कि वे बुडापेस्‍ट पर धावा बोल देंगे, भले ही इससे खून-खराबा ही क्‍यों न शुरू हो जाये, उनके पास अब खोने के लिए कुछ भी नहीं बचा है। बुडापेस्‍ट क्षेत्र में सैनिक बल तैनात कर दिये गये हैं, तथा उन्‍हें सख्‍त आदेश दे दिये गये हैं कि अगर लेशमात्र भी शांति भंग तो वे अपने आग्‍नेयास्‍त्र इस्‍तेमाल करें।’ ........................................ हम जा पहुँचे सबसे बड़े शहर में हममें से 1000 भूख से पीड़ि‍त थे 1000 के पास खाने को कुछ नहीं था 1000 को खाना चाहिए था। जनरल ने अपनी खिड़की से ...

हमारी इंडियन आर्मी

युवा सोच आज भीम आर्मी बनी कल पटेल आर्मी बनिया आर्मी ब्राह्मण आर्मी ठाकुर आर्मी तेली आर्मी कायस्थ आर्मी  अरे मूर्खो फिर हमारी इंडियन आर्मी क्या करेगी?

Kundan singh kanishk (युवा सोच): धार्मिक बँटवारे की साज़िशों को नाकाम करो! पूँजीवादी लूट के ख़िलाफ़ एकता क़ायम करो!

Kundan singh kanishk (युवा सोच): धार्मिक बँटवारे की साज़िशों को नाकाम करो! पूँजीवादी लूट के ख़िलाफ़ एकता क़ायम करो!

धार्मिक बँटवारे की साज़िशों को नाकाम करो! पूँजीवादी लूट के ख़िलाफ़ एकता क़ायम करो!

युवा सोच 🖋 Kundan Singh Kanishk धार्मिक बँटवारे की साज़िशों को नाकाम करो! पूँजीवादी लूट के ख़िलाफ़ एकता क़ायम करो! 👉 *धर्म और फासीवाद के बारे में कुछ उद्धरण* 🔶जब तक लोग अपनी स्वतंत्रता का इस्तेमाल करने की ज़हमत नहीं उठायेंगे, तब तक तानाशाहों का राज चलता रहेगा; क्योंकि तानाशाह सक्रिय और जोशीले होते हैं, और वे नींद में डूबे हुए लोगों को ज़ंजीरों में जकड़ने के लिए, ईश्वर, धर्म या किसी भी दूसरी चीज़ का सहारा लेने में नहीं हिचकेंगे। 🖊 फ्रांसीसी क्रान्ति की वैचारिक नींव तैयार करने वाले महान दार्शनिकों में से एक – वोल्तेयर 🔶एक तरफ जहाँ जन आन्दोलन और राष्ट्रीय आन्दोलन हुए, वहीं, उनके साथ-साथ जातिगत और साम्प्रदायिक आन्दोलनों को भी जान-बूझकर शुरू किया गया क्योंकि ये आन्दोलन न तो अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ थे, न किसी वर्ग के, बल्कि ये दूसरी जातियों के ख़िलाफ़ थे। 🖊 साम्प्रदायिक जुनून का मुकाबला करते हुए शहीद होने वाले महान राष्ट्रवादी पत्रकार गणेशशंकर विद्यार्थी 🔶प्रतिक्रियावादी बुर्जुआ वर्ग ने अपने आप को हर जगह धार्मिक झगड़ों को उभाड़ने के दुष्कृत्यों में संलग्न किया है, और वह र...

अर्थव्यवस्था चकाचक है तो लाखों इंजीनियर नौकरी से निकाले क्यों जा रहे हैं?

युवा सोच अर्थव्यवस्था चकाचक है तो लाखों इंजीनियर नौकरी से निकाले क्यों जा रहे हैं? 🖋Kundan Singh kanishk नरेन्द्र मोदी विकास के बड़े-बड़े दावे करते हुए सत्ता में आये थे। देश को ऐसी विकास यात्रा पर ले चलने के सपने दिखाये गये थे जिसमें करोड़ों रोज़गार पैदा होंगे। मगर पिछले 3 साल में गौरक्षक दलों, लम्पट वाहिनियों और स्वयंभू एंटी-रोमियो दस्तों ‍आदि के अलावा नये रोज़गार कहीं पैदा होते नहीं दिख रहे हैं। उल्टे , आईटी जैसे जिन क्षेत्रों के लोग अपने को बहुत सुरक्षित और देश के बाकी अवाम से चार हाथ ऊपर समझते थे, उनके ऊपर भी गाज गिरनी शुरू हो गयी है। पिछले कुछ महीनों में देश की सबसे बड़ी 7 आईटी कम्पनियों से हज़ारों इंजीनियरों और मैनेजरों को निकाला जा चुका है। प्रसिद्ध मैनेजमेंट कन्सल्टेंट कम्पनी मैकिन्सी ‍की रिपोर्ट के अनुसार अगले 3 सालों में हर साल देश के 2 लाख साफ्टवेयर इंजीनियरों को नौकरी से निकाला जायेगा। यानी 3 साल में 6 लाख। ऐसा भी नहीं है कि केवल आईटी कम्पनियों से ही लोग निकाले जा रहे हैं। सबसे बड़ी इंजीनियरिंग कम्पनियों में से एक लार्सेन एंड टुब्रो (एल एंड टी) ने भी पिछले महीन...

मोदी सरकार की शिक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य पर भी सेवा शुल्‍क लगाने की साजिश को समझें

युवा सोच मोदी सरकार की शिक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य पर भी सेवा शुल्‍क लगाने की साजिश को समझें 🖊 Kundan Singh Kanishk जीएसटी लागु होने की खबरों के बीच ये प्रचार जोरों पर है कि श्रीनगर के सुहावने मौसम में चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा के बीच दक्षिणपंथी, वामपंथी, सेकुलर, ईमानदार, आदि सारे शासकों ने मिलकर आम राय से जनता पर भारी कृपा की और शिक्षा और इलाज पर जीएसटी की दर 0% रखी| लेकिन यह कोई नहीं बता रहा है कि पहली बार यह 0% दर का फैसला करने की जरुरत ही क्यों पड़ी? असल बात यह है कि शिक्षा और इलाज के लिए दिये जाने वाले शुल्क को अब पहली बार सेवा कर के दायरे में लिया गया है जिससे इस पर टैक्स लगाया जा सके| बस एक ही बार में झटका न लगे इसलिए अभी टैक्स की दर 0% रखी गई है लेकिन टैक्स लगाने का क़ानूनी इंतजाम हो गया है, आगे से इस पर कभी भी टैक्स की दर बढ़ाई जा सकेगी, बगैर क़ानून में परिवर्तन किये| ध्यान रहे यह टैक्स संस्थानों के मुनाफे पर नहीं, ग्राहक अर्थात छात्रों/मरीजों द्वारा दिए जाने वाले शुल्क पर होगा, अर्थात उस शुल्क में जुड़ जायेगा| ग़रीब तो जैसे-तैसे सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने या उसमें भ...

कार्ल मार्क्‍स का पत्र

युवा सोच कार्ल मार्क्‍स का पत्र - अपनी जीवनसाथी जेनी के नाम जो ज़िंदगी और अपने लक्ष्य के प्रति सच्चे और एकनिष्ठ होते हैं , जिनका जीवन मानव-मुक्ति के मार्ग-संधान और परियोजना को सच्चे अर्थों में समर्पित होता है , निजी ज़िंदगी में भी वे टूटकर प्यार करते हैं, वक़्त की आंच-गर्मी से उनके प्यार का रंग कभी फीका नहीं पड़ता | 1856 में 38 वर्षीय कार्ल मार्क्स ने 42 वर्षीय जेनी को, जो कई बच्चों की माँ हो चुकी थीं, एक प्रेमपत्र लिखा था | *इस लंबे पत्र में जेनी के प्रति उन्होने वही कोमल और उत्कट प्रेम प्रकट किया है जैसा वह छात्र-जीवन में महसूस करते थे|* इस पत्र का एक अंश यहाँ प्रस्तुत है : "मेरी प्रियतमा, "मैं तुम्हें फिर लिख रहा हूँ , इसलिए कि मैं अकेला हूँ और इसलिए कि मेरे मन में हमेशा तुम्हारे साथ बातचीत करना मुझे परेशान किए दे रहा है , जबकि तुम इसके बारे में न कुछ जानती हो , न कुछ सुनती हो और न ही मुझे उत्तर दे सकती हो ... मैं तुम्हें अपने सामने साक्षात देखता हूँ , मैं तुम्हें अपनी गोद में उठा लेता हूँ , मैं तुम्हें सिर से पाँव तक चूमता हूँ , मैं तुम्हारे सामने घुटने टेक देत...