युवा सोच
मोदी सरकार की शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी सेवा शुल्क लगाने की साजिश को समझें
🖊 Kundan Singh Kanishk
जीएसटी लागु होने की खबरों के बीच ये प्रचार जोरों पर है कि श्रीनगर के सुहावने मौसम में चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा के बीच दक्षिणपंथी, वामपंथी, सेकुलर, ईमानदार, आदि सारे शासकों ने मिलकर आम राय से जनता पर भारी कृपा की और शिक्षा और इलाज पर जीएसटी की दर 0% रखी|लेकिन यह कोई नहीं बता रहा है कि पहली बार यह 0% दर का फैसला करने की जरुरत ही क्यों पड़ी?
असल बात यह है कि शिक्षा और इलाज के लिए दिये जाने वाले शुल्क को अब पहली बार सेवा कर के दायरे में लिया गया है जिससे इस पर टैक्स लगाया जा सके| बस एक ही बार में झटका न लगे इसलिए अभी टैक्स की दर 0% रखी गई है लेकिन टैक्स लगाने का क़ानूनी इंतजाम हो गया है, आगे से इस पर कभी भी टैक्स की दर बढ़ाई जा सकेगी, बगैर क़ानून में परिवर्तन किये|
ध्यान रहे यह टैक्स संस्थानों के मुनाफे पर नहीं, ग्राहक अर्थात छात्रों/मरीजों द्वारा दिए जाने वाले शुल्क पर होगा, अर्थात उस शुल्क में जुड़ जायेगा|
ग़रीब तो जैसे-तैसे सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने या उसमें भी न पढ़ा सकने के लिए मजबूर हैं, पर मध्यवर्गीय भक्तों को ख़ुशी में लड्डू बाँटने चाहिए, 'राष्ट्रसेवा' का एक और मौका जो मिला है!
भामाकीजै!

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