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Kundan singh kanishk (युवा सोच): धार्मिक बँटवारे की साज़िशों को नाकाम करो! पूँजीवादी लूट के ख़िलाफ़ एकता क़ायम करो!

Kundan singh kanishk (युवा सोच): धार्मिक बँटवारे की साज़िशों को नाकाम करो! पूँजीवादी लूट के ख़िलाफ़ एकता क़ायम करो!

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सुबह की शुरुआत मैं एक ऐसी धरती का सपना देखता हूँ...

कुंदन सिंह कनिष्क के कलम से...🖋️   मैं एक ऐसी धरती का सपना देखता हूँ जहाँ आदमी आदमी से घृणा नहीं करे जहाँ धरती प्रेम के आशीर्वाद से पगी हो और रास्ते शान्ति की अल्पना से सुसज्जित मैं एक ऐसी धरती का सपना देखता हूँ जहाँ सभी को आज़ादी की मिठास मिले जहाँ अन्तरात्मा को लालच मार नहीं सके जहाँ धन का लोभ हमारे दिनों को नष्ट नहीं कर सके मैं एक ऐसी धरती का सपना देखता हूँ जहाँ काले या गोरे चाहे जिस भी नस्ल के तुम रहो धरती की सम्पदा का तुम्हारा हिस्सा तुम्हें मिले जहाँ हर आदमी आज़ाद हो जहाँ सिर झुकाये खड़ी हो दुरावस्था जहाँ मोतियों-सा अच्छल हो आनन्द और सबकी ज़रूरतें पूरी हों ऐसा ही सपना देखता हूँ मैं इस धरती का....

एक अपील....

युवा सोच एक निवेदन प्रिय मुख्यमंत्री जी, बिहार में छात्र पढाई करते हैं और सरकारी जॉब पाने के लिए रात-दिन एक कर मेहनत करते हैं लेकिन जब परीक्षा होता हैं और रिजल्ट में उनका नाम नहीं होता तो उन्हें बहुत दुःख होता हैं. घरवाले भी कहते हैं बेटा और मेहनत करो…लेकिन छात्र यह समझ में नहीं पाते कि एक क्लर्क के लिए और कितना मेहनत करने की जरुरत हैं. एक क्लर्क की तैयारी करने वाले के पास आईएएस की नॉलेज हो जाती हैं लेकिन उसका क्लर्क में नहीं होता हैं और उसका सबसे बड़ा कारण परीक्षाओं में चल रही धांधली हैं. कुछ छात्र तो हार कर, पढाई छोड़ सेटिंग कराने के लिए पैसे के जुगाड़ में लग जाते हैं. मतलब सेटिंग तो पक्का हो जाता हैं अगर पैसा हैं तो. जिसके पास पैसा नहीं या सेटिंग से नहीं चाहता वह कोचिंग टियुशन पढ़ाने लग जाता हैं. मतलब साफ़ हैं मुख्यमंत्री जी सेटिंग की जड़ गाँव-गाँव तक पहुँच चुकी हैं और सबसे ऊपर तक के लोग भी इसमें शामिल हैं. मैं नहीं जानता सत्ता के लोग इसमें जुड़े हैं की नहीं लेकिन जरुर जुड़े होंगे क्योंकि सत्ता तो अब आई हैं धंधा में तो पहले से होंगे. बिहार के छात्रों का भविष्य हर विभाग में...

एनपीए कैसे कम होता है?

युवा सोच   जनता की खून पसीने की कमाई का पैसा पूंजीपतियों को लूटा कर भारती शिपयार्ड (जी हाँ, भारती एयरटेल वालों की ही है, ऐसे बड़े नामों वाले केस बहुत हैं, माल्या तो छोटा ही है!) का 10 हज़ार करोड़ का कर्ज NPA हुआ| बैंक कैसे वसूल करते? अब यह कर्ज 3 हज़ार करोड़ में एडेलवीस को बेच दिया गया जिसे शुरू में सिर्फ 450 करोड़ देने हैं, बाकी किश्तों में| कंपनी का नाम बदल दिया गया है और 7 हजार करोड़ सर से उतरे तो दौड़ेगी भी! कम्पनी की क़ीमत बढ़ेगी, दाँव लगाने वाले वित्तीय पूँजीपति तगड़ा मुनाफा कमायेंगे|  और बैंक का 7 हज़ार करोड़ का बट्टे खाते में जाने वाला नुकसान ? वह हम देंगे, बढ़ते बैंक चार्ज, घटते डिपाजिट ब्याज़ से सिर्फ बैंक ग्राहक ही नहीं, बल्कि बैंक में जमा करने लायक कमाई न करने वाले भी क्योंकि सरकार बैंक को और पूँजी देगी| तो और टैक्स दें, बढे रेल भाड़े दें, बढ़ी कीमतें दें, 'राष्ट्रवादी' बनें!  पर 10 हज़ार करोड़ एनपीए तो कम हो गया ना, मितरों! By : Kundan Singh Kanishk.....